इस गर्मी में बदली सबकी दिनचर्या छात्रों से लेकर किसानों तक सब परेशान

अप्रैल का महीना सावन-सा सुहाना होता था, पर इस साल 2026 की गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस बार अप्रैल से ही लू का सितम शुरू हो गया। बिहार के गया में पारा 45°C पार कर गया और IMD का ‘रेड अलर्ट’ अब रोज की बात हो गई है। ये गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही, ये हर छात्र, किसान, मजदूर की रोटी और दिनचर्या दोनों पर असर डाल रही है।

 आम लोगों की बदली दिनचर्या

रात में गर्मी और बिजली कटौती से नींद पूरी नहीं होती। लोग भोर 4-5 बजे उठकर काम निपटाने लगे हैं खाने-पीने में भी बदलाव आया है तली-भुनी चीजें बंद। दही, सत्तू, बेल शरबत, ककड़ी, तरबूज पर लोग टिके हैं। हर घर में ORS का पैकेट जरूरी हो गया है।

लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है लू, डिहाइड्रेशन, फूड पॉइजनिंग के केस 3 गुना बढ़े। अस्पतालों में सुबह 8 बजे से ही लंबी लाइन।

बिजली बिल 40% तक अधिक बढ़ गया है दिन-रात कूलर-पंखा चलने से बिल डबल, पर कटौती फिर भी 6-8 घंटे रोज।

छात्रों की मुश्किलें

स्कूल टाइमिंग ज्यादातर सरकारी-प्राइवेट स्कूल 6:30 से 11:00 AM कर दिए गए। बच्चों को 5 बजे उठना पड़ रहा है, दोपहर में बिजली न होने से होमवर्क या ऑनलाइन क्लास नहीं हो पाती। कमरे तपते हैं तो ध्यान भी नहीं लगता। छात्रों पर स्वास्थ्य का जोखिम भी बढ़ गया है बस-ऑटो में भीड़ और गर्मी से कई बच्चे रास्ते में ही बीमार पड़ रहे हैं। कोचिंग सेंटरAC वाले कोचिंग की फीस बढ़ गई, गरीब बच्चे पिछड़ रहे हैं।

किसानों का दर्द

मक्का, मूंग, सब्ज़ी की फसल 30-40% तक झुलस गई। धान की नर्सरी डालने के लिए पानी नहीं मिल रहा, सिंचाई का खर्च डबल नहर सूखी है, भूजल स्तर गिरा है। 1 घंटे डीजल पंप चलाने का खर्च ₹120+ हो गया। काम का समय सुबह 5-9 और शाम 5-7 ही खेत में जा पा रहे हैं। दोपहर में काम मतलब लू लगना तय। पशुओं को लेकर भी दिक्कत में है किसान दूध 20% तक कम हो गया। चारे की कमी और लू से मवेशी बीमार पड़ रहे हैं।

 मजदूर और दिहाड़ी वर्ग भी कर रहे हैं इस कठिनाई का सामना

राजमिस्त्री, पेंटर, ठेला वाले दोपहर 12-4 काम बंद कर देते हैं। 8 घंटे की जगह 5 घंटे काम = दिहाड़ी में ₹200-300 की कटौती, जान का जोखिम भी बढ़ गया है मनरेगा, सड़क निर्माण में काम करने वाले मजदूरों में लू लगने के केस सबसे ज्यादा। डिलीवरी बॉय/रिक्शा चालक सिर पर गमछा बांधकर भी 10 मिनट धूप में खड़ा होना मुश्किल। टारगेट पूरा न होने से सैलरी कट रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक मई-जून में हालात और बिगड़ सकते हैं। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि दोपहर 12-4 बजे तक बाहर न निकलें, सूती कपड़े पहनें, और सिर ढककर रखें। सरकार ने स्कूल टाइमिंग और मनरेगा काम का समय तो बदला है, पर बिजली-पानी की गारंटी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है। गर्मी का ये प्रकोप हमें बता रहा है कि मौसम अब सिर्फ मौसम नहीं रहा। जरूरत है कि हम पानी बचाएं, पेड़ लगाएं और दोपहर में काम का समय बदलें। जब तक सरकार बिजली-पानी का स्थायी हल नहीं निकालती, तब तक ‘सावधानी’ ही सबसे बड़ा बचाव है। 

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