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फिर विवादों में नीट यूजी परीक्षा

 देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में आ गई है. इस बार मामला एक कथित गेस पेपर को लेकर सामने आया है जिसे लेकर राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जांच कर रही है. दावा किया जा रहा है कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच एक ऐसा पेपर घूम रहा था जिसके कई सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे. इस पूरे मामले ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. .राजस्थान SOG की जांच में सामने आया है कि एक गेस पेपर में करीब 410 प्रश्न थे. आरोप है कि इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे NEET UG 2026 के केमिस्ट्री सेक्शन में पूछे गए वहीं कुछ सूत्रों का दावा है कि कुल मिलाकर करीब 150 सवाल असली परीक्षा से मैच हुए हैं चूंकि NEET UG परीक्षा कुल 720 अंकों की होती है और हर सवाल 4 अंक का होता है, ऐसे में इतने बड़े स्तर पर सवालों का मिलना बेहद गंभीर माना जा रहा है. इसी वजह से पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है. छात्र की ओर से भेजे क्वेश्चन बैंक में करीब 300 सवाल थे जिनमें से 150 हुबहू आए थे. कुल 180 सवाल हल करने थे हर सवाल के चार अंक यानी 720 में 600 अंक के सवाल इस क्वेश्चन ...

विक्रमशिला सेतु

 विक्रमशिला सेतु का टूटना सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर फेल्योर नहीं है— यह सिस्टम की कमजोरियों का आईना है। स्थानीय लोग पहले से चेतावनी दे रहे थे इंजीनियरों के बयान और हकीकत में अंतर था और अंत में, नुकसान आम जनता को झेलना पड़ा। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं था, बल्कि लाखों लोगों की जीवनरेखा था। 2001 में बना यह लगभग 4.4 – 4.7 किमी लंबा पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ता था। लेकिन मई 2026 में इसका एक हिस्सा अचानक गिर गया—और इसके साथ ही लोगों का भरोसा भी हिल गया। स्थानीय लोगों की राय (ग्राउंड रियालिटी) हादसे के बाद सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा। लोग क्या कह रहे हैं? “हम सालों से पुल की खराब हालत की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।” “अब हमें 100 किमी लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है।” “नाव से जाना पड़ रहा है, लेकिन वहां भी भीड़ और अव्यवस्था है।” सच यह है कि पुल बंद होने के बाद लोग नावों के भरोसे यात्रा कर रहे हैं घंटों इंतजार करना पड़ रहा है रोज़गार, पढ़ाई और इलाज सब प्रभावित हो रहे हैंस्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पुल ...
  भागलपुर का ‘जर्दालू आम’: GI टैग वाला शाही फल , जिसकी खुशबू से महक उठता है बिहार जब गर्मी चरम पर हो और आम की बात चले , तो भागलपुर का नाम आते ही जुबां पर एक ही नाम आता है – जर्दालू। ये सिर्फ आम नहीं , बिहार की पहचान और शान है। 2018 में इसे GI टैग मिला , और तब से ये आम से ‘ब्रांड’ बन गया। जर्दालू आम की पहचान हल्का नींबू-पीला रंग , साइज में छोटा – वजन सिर्फ 100 से 150 ग्राम। इसकी खासियत   है तीखी-मीठी खुशबू। कहते हैं कि इसकी सुगंध दूर से ही बता देती है कि जर्दालू आया है। गूदा रेशे-रहित , मलाईदार और बेहद मीठा।   मिट्टी का कमाल: ये सिर्फ भागलपुर और आसपास की उपजाऊ जमीन में ही अपना असली स्वाद-खुशबू पाता है। कहीं और उगाओ तो वो बात नहीं आती। जर्दालू आम का सीजन छोटा लेकिन दमदार होता है। मई के आखिरी हफ्ते से जून के दूसरे हफ्ते तक ही ये बाजार में मिलता है। कुल 20-25 दिन। इसीलिए लोग इसका साल भर इंतजार करते हैं। जून के पहले हफ्ते में ही भागलपुर से PM, राष्ट्रपति और देश के बड़े गणमान्य लोगों को गिफ्ट के तौर पर जर्दालू भेजा जाता है। GI टैग ने कैसे बदली किस्मत ? 2018 ...
  IPL 2026: पैसा , पावर और प्रेशर – इस साल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग कहां खड़ी है ? IPL अब सिर्फ टूर्नामेंट नहीं रहा , ये 2 महीने का ‘इकोनॉमिक इंजन’ बन चुका है। 2026 में लीग अपने 19 वें सीजन में है , और आंकड़े बताते हैं कि ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ अब इसका बेसलाइन बन गया है। कमाई और वैल्यूएशन: कितना बड़ा है IPL? लीग की कुल वैल्यू: FY 25 में $18 बिलियन थी , 2026 में $19 बिलियन = ₹17,62,665 करोड़ हो गई। KPMG का अनुमान है 2030 तक ये डबल होगी। BCCI की रीढ़: IPL अकेले BCCI की कुल कमाई का 59% देता है। FY 24 में सिर्फ IPL से ₹5,761 करोड़ आए। मीडिया राइट्स गोल्डमाइन: 2023-2026 का साइकिल $6.4 बिलियन = ₹5,93,740 करोड़ का है। इसी दम पर दुनिया भर के बोर्ड IPL विंडो में मैच शेड्यूल नहीं करते। टीम स्पॉन्सरशिप: इस साल टोटल स्पॉन्सरशिप ₹1,000 करोड़ पार। MI, RCB, CSK हर एक ~₹150 करोड़ जुटा रहे हैं। टीमों की कीमत: $1 बिलियन क्लब असली हुआ मार्च 2026 ने IPL की तस्वीर बदल दी। दो बड़ी डील हुईं: RCB बिका $1.78 बिलियन में – IPL इतिहास की सबसे महंगी टीम। Rajasthan Royals $1.63 बिलियन – कुछ...
इस गर्मी में बदली सबकी दिनचर्या छात्रों से लेकर किसानों तक सब परेशान अप्रैल का महीना सावन-सा सुहाना होता था , पर इस साल 2026 की गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस बार अप्रैल से ही लू का सितम शुरू हो गया। बिहार के गया में पारा 45°C पार कर गया और IMD का ‘रेड अलर्ट’ अब रोज की बात हो गई है। ये गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही , ये हर छात्र , किसान , मजदूर की रोटी और दिनचर्या दोनों पर असर डाल रही है।   आम लोगों की बदली दिनचर्या रात में गर्मी और बिजली कटौती से नींद पूरी नहीं होती। लोग भोर 4-5 बजे उठकर काम निपटाने लगे हैं खाने-पीने में भी बदलाव आया है तली-भुनी चीजें बंद। दही , सत्तू , बेल शरबत , ककड़ी , तरबूज पर लोग टिके हैं। हर घर में ORS का पैकेट जरूरी हो गया है। लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है लू , डिहाइड्रेशन , फूड पॉइजनिंग के केस 3 गुना बढ़े। अस्पतालों में सुबह 8 बजे से ही लंबी लाइन। बिजली बिल 40% तक अधिक बढ़ गया है दिन-रात कूलर-पंखा चलने से बिल डबल , पर कटौती फिर भी 6-8 घंटे रोज। छात्रों की मुश्किलें स्कूल टाइमिंग ज्यादातर सरकारी-प्राइवेट स्कूल 6:30 से 1...