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Showing posts from April, 2026
  भागलपुर का ‘जर्दालू आम’: GI टैग वाला शाही फल , जिसकी खुशबू से महक उठता है बिहार जब गर्मी चरम पर हो और आम की बात चले , तो भागलपुर का नाम आते ही जुबां पर एक ही नाम आता है – जर्दालू। ये सिर्फ आम नहीं , बिहार की पहचान और शान है। 2018 में इसे GI टैग मिला , और तब से ये आम से ‘ब्रांड’ बन गया। जर्दालू आम की पहचान हल्का नींबू-पीला रंग , साइज में छोटा – वजन सिर्फ 100 से 150 ग्राम। इसकी खासियत   है तीखी-मीठी खुशबू। कहते हैं कि इसकी सुगंध दूर से ही बता देती है कि जर्दालू आया है। गूदा रेशे-रहित , मलाईदार और बेहद मीठा।   मिट्टी का कमाल: ये सिर्फ भागलपुर और आसपास की उपजाऊ जमीन में ही अपना असली स्वाद-खुशबू पाता है। कहीं और उगाओ तो वो बात नहीं आती। जर्दालू आम का सीजन छोटा लेकिन दमदार होता है। मई के आखिरी हफ्ते से जून के दूसरे हफ्ते तक ही ये बाजार में मिलता है। कुल 20-25 दिन। इसीलिए लोग इसका साल भर इंतजार करते हैं। जून के पहले हफ्ते में ही भागलपुर से PM, राष्ट्रपति और देश के बड़े गणमान्य लोगों को गिफ्ट के तौर पर जर्दालू भेजा जाता है। GI टैग ने कैसे बदली किस्मत ? 2018 ...
  IPL 2026: पैसा , पावर और प्रेशर – इस साल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग कहां खड़ी है ? IPL अब सिर्फ टूर्नामेंट नहीं रहा , ये 2 महीने का ‘इकोनॉमिक इंजन’ बन चुका है। 2026 में लीग अपने 19 वें सीजन में है , और आंकड़े बताते हैं कि ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ अब इसका बेसलाइन बन गया है। कमाई और वैल्यूएशन: कितना बड़ा है IPL? लीग की कुल वैल्यू: FY 25 में $18 बिलियन थी , 2026 में $19 बिलियन = ₹17,62,665 करोड़ हो गई। KPMG का अनुमान है 2030 तक ये डबल होगी। BCCI की रीढ़: IPL अकेले BCCI की कुल कमाई का 59% देता है। FY 24 में सिर्फ IPL से ₹5,761 करोड़ आए। मीडिया राइट्स गोल्डमाइन: 2023-2026 का साइकिल $6.4 बिलियन = ₹5,93,740 करोड़ का है। इसी दम पर दुनिया भर के बोर्ड IPL विंडो में मैच शेड्यूल नहीं करते। टीम स्पॉन्सरशिप: इस साल टोटल स्पॉन्सरशिप ₹1,000 करोड़ पार। MI, RCB, CSK हर एक ~₹150 करोड़ जुटा रहे हैं। टीमों की कीमत: $1 बिलियन क्लब असली हुआ मार्च 2026 ने IPL की तस्वीर बदल दी। दो बड़ी डील हुईं: RCB बिका $1.78 बिलियन में – IPL इतिहास की सबसे महंगी टीम। Rajasthan Royals $1.63 बिलियन – कुछ...
इस गर्मी में बदली सबकी दिनचर्या छात्रों से लेकर किसानों तक सब परेशान अप्रैल का महीना सावन-सा सुहाना होता था , पर इस साल 2026 की गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस बार अप्रैल से ही लू का सितम शुरू हो गया। बिहार के गया में पारा 45°C पार कर गया और IMD का ‘रेड अलर्ट’ अब रोज की बात हो गई है। ये गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही , ये हर छात्र , किसान , मजदूर की रोटी और दिनचर्या दोनों पर असर डाल रही है।   आम लोगों की बदली दिनचर्या रात में गर्मी और बिजली कटौती से नींद पूरी नहीं होती। लोग भोर 4-5 बजे उठकर काम निपटाने लगे हैं खाने-पीने में भी बदलाव आया है तली-भुनी चीजें बंद। दही , सत्तू , बेल शरबत , ककड़ी , तरबूज पर लोग टिके हैं। हर घर में ORS का पैकेट जरूरी हो गया है। लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है लू , डिहाइड्रेशन , फूड पॉइजनिंग के केस 3 गुना बढ़े। अस्पतालों में सुबह 8 बजे से ही लंबी लाइन। बिजली बिल 40% तक अधिक बढ़ गया है दिन-रात कूलर-पंखा चलने से बिल डबल , पर कटौती फिर भी 6-8 घंटे रोज। छात्रों की मुश्किलें स्कूल टाइमिंग ज्यादातर सरकारी-प्राइवेट स्कूल 6:30 से 1...